“There are wounds that never show on the body that are deeper and more hurtful than anything that bleeds.”
― Mistral's Kiss
― Mistral's Kiss
ALWAYS MISS THIS SMILE......
आज १६ जून है आज दो दिन हो गए हैं, खबर सुने के शुशांत सिंह राजपूत को भगवान् के घर गये हुए बस विश्वास नहीं हो रहा है के ऐसा शानदार इंसान और अभिनेता अब इस दुनिया को छोड़ कर चला गया है ,उनके पुरे परिवार के साथ मेरी सहानुभूति है और भगवान् उन्हें इस मुश्किल घड़ी में दुःख सेहन करने की हिम्मत दे और शुशांत सिंह राजपूत की आत्मा को शान्ति दे । उनके परिवार के सदस्य (शुशांत सिंह राजपूत )की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता है। एक पिता को उसका बेटा कोई नहीं लौटा सकता है ,बहनो को उनका भाई जो रक्षाबंधन पर उनकी रक्षा का वादा करता है नहीं लौटा सकता है। लोग बस कुछ समय के लिए याद करेंगे सुशांत सिंह राजपूत को बस एक परिवार है जो हर ख़ुशी में हर त्यौहार में उनकी यादों को याद करेगा एक पल भी ऐसा नहीं जायेगा जब एक पिता को अपने बेटे की याद नहीं आएगी.. "जिस माँ को वो याद कर रहे थे आज उसी की गोद में चले गए" , न्यूज़ में इतना कुछ चल रहा है बस समझ नहीं आता है लोग किसी क जाने के बाद ही क्यों उसकी फ़िक्र करने लगते हैं। इंसान जब सामने था तब तो उसे किसी ने पूछा नहीं अब जाने क बाद सब बोलते हैं क हमे पता होता के वो ऐसे दौर से गुजर रहा था तो हम सहायता करते। ये हाथ पहले क्यों नहीं आये सामने मदद के लिए और वो कान कहाँ गए जो उसे सुन सकते सकते थे उसके मन में क्या चल रहा था किसी ने कभी जानने की कोशिश क्यों नहीं की ?मैं हैरान हूँ के कोई इतने लोगों क साथ और इतनी भीड़ में भी क्या कोई एक इंसान ऐसा नहीं था जो उन्हें सुन सकता उनकी मनोस्थिति को जान सकता ? आज न्यूज़ में आ रहा है क वो 'डिप्रेशन 'की वजह से ऐसा किया उन्होंन ,डिप्रेशन का मतलब ये नहीं है के वो इंसान पागल है, मानसिक रूप से असन्तुलित है या कमजोर है। हमारा समाज कब इस बात को स्वीकार करेगा के "डिप्रेशन " सिर्फ एक ज़िन्दगी का दौर है जो हर इंसान की लाइफ में आता है कोई बीमारी नहीं है। इस आधार पर आप किसी भी इंसान की ताकत या कमजोरी तय नहीं कर सकते हो के वो कैसा है। मैंने कहीं पढ़ा था के "डिप्रेशन में चोट लगने जैसा नहीं है के लहू बहता है ,वो हड्डी टूटने जैसा नहीं जो दर्द हो ,इसके निशाँ नहीं दीखते हैं शरीर पर " ,ये ऐसी स्थिति है जो सामने नहीं दिखती है ,परन्तु दर्द उतना ही देती है मन पर । मैंने उनकी सभी फिल्मे तो नहीं देखि हैं परन्तु सुना यही है क शुशांत सिंह राजपूत ने "छिछोरे" में जो अभिनय किया है वो बहुत ही बढ़िया था जिसकी कहानी ही सारी "सुसाइड इस नॉट सलूशन"पर आधारित थी वो इंसान कैसे इतना बड़ा कदम उठा सकता है और वो कमजोर तो कभी हो ही नहीं सकता। हमारे समाज , लोगो को और सभी और डिप्रेशन के बारे में आगे आकर इसकी लोगों तक जाकारी पहुँचाने की जरुरत है और सबसे पहले इसे स्वीकार करने की जरुरत है और सकारात्मकता और सम्वेदनशीलता के साथ।
https://youtu.be/eEi0148JVVs


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